Sandhi – I

संधि का शाब्दिक अर्थ – वर्णो का मेल

 संधि की परिभाषा – दो वर्णो के आपस में मेल से जो विकार होता हैं उसे संधि कहते हैं

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उदाहरण-
राम + अवतार = रामावतार
न + इति = नेति
जगत+ईश  = जगदीश
बाल + इन्दु  = बालेन्दु 

Note:- यदि वर्णो के आपस में मेल से किसी भी प्रकार का परिवर्तन नही होता है और वर्ण वैसा का वैसा आ जाता तो वहा संधि नही संयोग होता है इस संयोग में संधि का किसी भी प्रकार का  नियम लागु नही होता है
उदाहरण –
पंक + ज = पंकज 
युग +बोध = युगबोध 
थाने +दार = थानेदार  

  • संधि के प्रकार 
  1. स्वर संधि 
  2. व्यंजन  संधि 
  3. विसर्ग संधि 
  • स्वर संधि – ये संधि पांच प्रकार की होती हैं 
  1. दीर्घ संधि :- यदि अ , इ , उ , ऋ के बाद में कोई भी समान स्वर आये तो वहाँ दीर्घ संधि  होती हैं 

स्थिति :-

    इ + इ = ई        उ + उ  = ऊ       ऋ  + ऋ  = ऋ 
    ई + इ = ई       ऊ + उ  = ऊ        ॠ   + ऋ  = ऋ
    इ + ई = ई       उ + ऊ = ऊ         ऋ  + ॠ   = ऋ
    ई + ई = ई       ऊ + ऊ =ऊ         ॠ  + ॠ  = ऋ
    पहचान :– आपस में समान स्वर मिलेंगे ( समान स्वर + समान स्वर )
    Trick :-  दे + व् +अ +आ +ल +य 
                   देव + आलय 
                     देवालय 
    Ex:- 
    1.  रस +आयन = रसायन 
    2.  मही  + इंद्र   = महीन्द्र  
    3. गीत + अंजली = गीतांजली
    4. कपि + ईश  = कपीश 
    5. वधु + उत्सव = वधूत्सव 
    6. पितृ + ऋण = पितृण 
    7. भू + उपरि = भूपरि

    Sandhi Part – II Click Here

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