विसर्ग संधि हिंदी ग्रामर

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यदि विसर्ग के साथ व्यंजन अथवा स्वर का मेल होता हैं तो वहाँ विसर्ग संधि होती हैं ।

उत्व विसर्ग :- यदि विसर्ग से पूर्व अ हो और  विसर्ग के बाद में अ हो तो विसर्ग का “उ ” हो जायेगा तथा अ , ओ के बाद ह्रस्व अ आने पर पूर्व रूप हो जाता हैं ।

सत्व विसर्ग :-

विसर्ग का तालव्य होना:-  यदि विसर्ग के बाद में च , छ , व  दन्तय स् आये तो विसर्ग तालव्य  श् में बदल जायेगा । 
 
उदाहरण :-
क : + चित = कश्चित 
पुनः + च = पुनश्च 
आ: + चर्य  = आश्चर्य 
तपः + चर्य = तपश्चर्य 
 

विसर्ग का दन्तय स् होना:- यदि विसर्ग के बाद में त , थ , व  दन्तय स् आये तो विसर्ग दन्तय स् में बदल जायेगा ।



उदाहरण :-
नमः + ते = नमस्ते
मन:+संताप =मनस्संताप 
 
यदि विसर्ग के बाद में ट , ठ , व  मूर्धन्य ष् आये तो विसर्ग मूर्धन्य ष् में बदल जायेगा ।
उदाहरण :-
धनु :+ टँकार= धनुष्टंकार
चतु : + टीका  = चतुष्टीका


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