व्यंजन संधि हिंदी ग्रामर

➥ जंहा पर व्यंजन का स्वर से या व्यंजन से व्यंजन का मेल होता हैं तो वहाँ पर व्यंजन संधि होती हैं । 

Vynjan Sandhi

➧ यदि दन्तय स् या त वर्ग के बाद में तालव्य  श् या च वर्ग आ। ये तो दन्तय  स् तालव्य  श् त वर्ग क्रमानुसार च वर्ग में बदल जाता हैं 



➧ दन्तय  स् त वर्ग  के बाद में मूर्धन्य ष् आये तो दन्तय  स् मूर्धन्य ष् में त वर्ग क्रमानुसार ट  वर्ग में बदल जाता हैं 
 
➧ यदि क , च , ट , त, प के बाद में असमान स्वर या प्रयेक वर्ग का तीसरा , चौथा शब्द व य, र , ल , व आये तो प्रत्येक वर्ग का प्रथम अक्षर अपने के तीसरे में बदल जायेगा। 
 
 ✪उदाहरण : 
जगत् + ईश  = जगदीश 
ऋक् + वेद   = ऋग्वेद 
दिक् + दर्शन = दिग्दर्शन 
जगत् + अम्बा = जगदम्बा 
वाक् + ईश  = वागीश 
भगवत् + गीत = भगवदगीता 
 
➧ यदि क , च , ट , त, प के बाद में कोई भी पंचम ध्वनि आये तो प्रत्येक वर्ग का प्रथम अक्षर अपने वर्ग के पंचम वर्ग  में बदल जायेगा। 
 
✽ पहचान : शब्द के बीच में डबल अनुनाशिक ध्वनि का होना।  
 
 ✪उदाहरण :
जगत् + नाथ  = जगन्नाथ 
तत् + मय    = तन्मय  
वाक् + मय  = वाङ्मय  
षट् + मुख  = षण्मूक 
सत् + नारी  = सन्नारी 
पुत्+ मुख = पुन्मुख 
 
➧ यदि अनुनासिक वर्ण के बाद स्पर्श व्यंजन आये तो अनुनासिक वर्ण जिस वर्ग का स्पर्श व्यंजन होगा उसी के पांचवे में बदल जायेगा ओर विकल्प से अनुस्वार जायेगा। 
 

✪उदाहरण :
सम्+चय = संचय 
सम्+तोष = संतोष 
सत्+न्यास = सन्यास 
सम्+प्रधान = सम्प्रधान 
सम्+कल्प = संकल्प 
किम + नर = किन्नर 
सम्+घात = संघात 
 
➧ यदि अनुनासिक वर्ण के बाद य, र , ल , व श , ष , स , ह , क्ष, त्र, ज्ञ का कोई वर्ण होने पर अनुनासिक वर्ण के स्थान पर अनुस्वार हो जाता है । 
 
✪उदाहरण :
सम्+क्षिप्त = संक्षिप्त  
सम्+वाद  = संवाद  
सम्+लग्न  = संलग्न 
सम्+ वेदना = संवेदना 
सम् + वेद  = संवेद  
सम्+सार  = संसार  
 
✤ त् / द् से सम्बन्धित नियम :
 


✦ त् / द् + च =  च्च 
✦ त् / द् + छ = च्छ 
✦ त् / द् + ज = ज्ज 
✦ त् / द् + ट = ट्ट 
✦ त् / द् + ड = ड्ड 
✦ त् / द् + ल = ल्ल 
✦ त् / द् + ह = ध्ह 
✦ त् / द् + श  = च्छ
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